श्लोक

दैनिक श्लोकअर्थ सहित

छह छोटे श्लोक जो अनेक हिंदू घरों में रोज़ बोले जाते हैं, हर एक अर्थ और हमारे वीडियो के साथ।

सूर्योदय के समय झील के ऊपर स्तंभों वाले मंदिर मंडप में गुलाबी कमल पर विराजमान भगवान गणेश, हाथों में कमल, अंकुश और लड्डू, पास में मूषक

एक हर काम के आरंभ से पहले, एक शिव को, एक आरती के बाद, एक देवी को, एक गुरु को और एक श्रीकृष्ण को। हर श्लोक देवनागरी में, उसके अर्थ, स्रोत और बोलने के समय के साथ दिया है।

वक्रतुण्ड महाकायगणेश

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ: हे मुड़ी सूंड वाले, विशाल देह वाले, करोड़ सूर्यों जैसे तेज वाले देव, मेरे सब कार्य सदा बिना विघ्न पूरे करें।

कब: कोई भी नया काम शुरू करने से पहले: यात्रा, परीक्षा, पूजा या दिन का काम। बुधवार गणेश जी का दिन है।

स्रोत: गणेश जी का पारंपरिक श्लोक। श्री गणेश की कथा

वक्रतुण्ड महाकाय: अर्थ जानकर बोलिए
वक्रतुण्ड महाकाय: अर्थ जानकर बोलिए

ॐ नमः शिवायशिव

ॐ नमः शिवाय॥

अर्थ: ॐ, कल्याणकारी शिव को नमस्कार।

इसके पाँच अक्षर, न, मः, शि, वा और य, परंपरा में पाँच तत्वों से जोड़े जाते हैं: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश।

कब: कभी भी, और विशेषकर सोमवार, प्रदोष की संध्या और पूरे सावन। 108 और 27 बार जाप की हमारी फिल्में जाप पेज पर हैं।

स्रोत: पंचाक्षरी मंत्र, यजुर्वेद के श्री रुद्रम् से। मंत्र जाप

ॐ नमः शिवाय के पाँच अक्षरों का अर्थ
ॐ नमः शिवाय के पाँच अक्षरों का अर्थ

कर्पूरगौरंशिव और पार्वती

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

अर्थ: कपूर जैसे गौर, करुणा के अवतार, संसार के सार, नागराज की माला वाले, जो सदा हृदय-कमल में वास करते हैं, भवानी सहित उन शिव को नमन।

कुछ ग्रंथों में सदा वसन्तं की जगह सदा रमन्तं पाठ है।

कब: आरती के अंत में, दीप अर्पित करते समय गाया जाता है।

स्रोत: शिव की पारंपरिक स्तुति का श्लोक। भगवान शिव की कथा

कर्पूरगौरं, आरती के बाद का श्लोक, अर्थ सहित
कर्पूरगौरं, आरती के बाद का श्लोक, अर्थ सहित

सर्वमङ्गलमाङ्गल्येदुर्गा

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे सब मंगलों में मंगलमयी, कल्याणकारी, सब मनोरथ पूरे करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्री गौरी, नारायणी, आपको नमस्कार है।

कब: नवरात्रि में, शुक्रवार को और किसी भी देवी पूजा के अंत में।

स्रोत: दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय की नारायणी स्तुति से। माँ दुर्गा की कथा

सर्वमंगल मांगल्ये: इस श्लोक का अर्थ
सर्वमंगल मांगल्ये: इस श्लोक का अर्थ

गुरुर्ब्रह्मागुरु

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा, गुरु ही विष्णु, गुरु ही महेश; गुरु साक्षात् परब्रह्म हैं, उन श्री गुरु को नमन।

कब: पढ़ाई या सीखने से पहले, और गुरु पूर्णिमा पर। अनेक लोग इसे माता-पिता, शिक्षकों और हर उस व्यक्ति को अर्पित करते हैं जिसने उन्हें कुछ सिखाया।

स्रोत: गुरु गीता से।

गुरुर्ब्रह्मा: अपने गुरु को प्रणाम
गुरुर्ब्रह्मा: अपने गुरु को प्रणाम

मधुराष्टकम्श्रीकृष्ण

श्लोक 1

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ: अधर मधुर हैं, मुख मधुर है, नयन मधुर हैं, मुस्कान मधुर है, हृदय मधुर है, चाल मधुर है: मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

श्लोक 2

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम्।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ: वचन मधुर हैं, चरित्र मधुर है, वस्त्र मधुर हैं, अंगों का मुड़ना मधुर है, चलना मधुर है, घूमना मधुर है: मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

श्लोक 3

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ: बांसुरी मधुर है, चरणों की धूल मधुर है, हाथ मधुर हैं, चरण मधुर हैं, नृत्य मधुर है, मित्रता मधुर है: मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

श्लोक 4

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ: गीत मधुर है, पीना मधुर है, खाना मधुर है, सोना मधुर है, रूप मधुर है, तिलक मधुर है: मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

श्लोक 5

करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम्।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ: कर्म मधुर हैं, तारना मधुर है, हरना मधुर है, रमण मधुर है, त्यागना मधुर है, शांत भाव मधुर है: मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

श्लोक 6

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ: गुंजा की माला मधुर है, फूलों की माला मधुर है, यमुना मधुर है, उसकी लहरें मधुर हैं, जल मधुर है, कमल मधुर है: मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

श्लोक 7

गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्।
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ: गोपियाँ मधुर हैं, लीला मधुर है, मिलन मधुर है, मुक्ति मधुर है, दृष्टि मधुर है, शिष्टता मधुर है: मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

श्लोक 8

गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ: ग्वाले मधुर हैं, गायें मधुर हैं, छड़ी मधुर है, सृष्टि मधुर है, तोड़ना मधुर है, फल देना मधुर है: मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

आठ श्लोक, हर एक उसी पंक्ति पर समाप्त: मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

कब: जब भी श्रीकृष्ण का स्मरण हो: जन्माष्टमी, एकादशी, या संध्या दीपक के समय।

स्रोत: श्री वल्लभाचार्य रचित। श्रीकृष्ण की कथा

अधरं मधुरं का अर्थ, मिठास के अधिपति
अधरं मधुरं का अर्थ, मिठास के अधिपति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्र और श्लोक में क्या अंतर है?

मंत्र एक पवित्र सूत्र है जिसका जप किया जाता है, अक्सर वेदों से। श्लोक एक पद्य है, प्रायः महाकाव्यों, पुराणों या बाद की भक्ति कविता से, जो प्रार्थना की तरह बोला जाता है। रोज़ की बोलचाल में दोनों शब्द एक-दूसरे की जगह भी आते हैं।

बच्चे को सबसे पहले कौन-सा श्लोक सिखाएँ?

अधिकतर परिवार वक्रतुण्ड महाकाय और गुरुर्ब्रह्मा से शुरू करते हैं: छोटे, बोलने में सरल और रोज़ काम आने वाले।

क्या इन्हें संस्कृत में ही बोलना चाहिए?

संस्कृत में बोलने से वह ध्वनि बनी रहती है जिसे परंपरा सदियों से सहेजती आई है। यहाँ दिया अर्थ जानने से आप इन्हें भाव के साथ बोल पाते हैं।

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