हिंदू देवी-देवताओं के अवतारHindu God Avatars
अवतार (Avatar) वह दिव्य रूप है जिसमें परमात्मा धर्म की रक्षा और भक्तों के कल्याण हेतु इस संसार में अवतरित होते हैं। इस संग्रह में हिंदू परंपरा के सबसे प्रिय अवतार परिवार के अनुसार संकलित हैं: भगवान विष्णु के दस अवतार, भगवान शिव के अनेक रूप, तथा माँ आदिशक्ति के अनेक रूप, प्रत्येक की कथा, अर्थ और मंत्र के साथ।
भगवान विष्णु के दस अवतार (दशावतार)
दशावतार भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतार हैं, जो प्रत्येक युग में सज्जनों की रक्षा और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतरित होते हैं।
महाप्रलय से वेदों और मनु की रक्षा करने वाले दिव्य मत्स्य।
समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण करने वाले कच्छप।
पृथ्वी को जलमग्न गहराइयों से बाहर निकालने वाले वराह।
भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु हिरण्यकशिपु का वध करने वाले नरसिंह।
तीन पगों में समस्त सृष्टि नाप लेने वाले वामन ब्राह्मण।
अधर्मी राजाओं का नाश कर धर्म की पुनर्स्थापना करने वाले परशुराम।
अयोध्या के मर्यादा पुरुषोत्तम, रामायण के नायक।
गोपाल, सखा और भगवद्गीता के दिव्य उपदेशक।
करुणा और अहिंसा का उपदेश देने वाले प्रबुद्ध।
कलियुग का अंत करने वाले आने वाले अवतार।
भगवान विष्णु अनेक अन्य रूपों में भी पूजे जाते हैं, जैसे वेंकटेश्वर (बालाजी), जगन्नाथ, विठोबा, हयग्रीव, मोहिनी और लक्ष्मीनारायण।
भगवान शिव के रूप और अवतार
शिव निराकार परब्रह्म सदाशिव के रूप में पूजे जाते हैं, फिर भी भक्तों को अनेक रूपों में दर्शन देते हैं। शिव पुराण में वर्णित रुद्रावतारों में हनुमान जी को ग्यारहवाँ माना गया है।
सृष्टि और संहार के ब्रह्मांडीय नृत्य के स्वामी।
काल और दिशाओं के रक्षक, शिव का उग्र रूप।
आधे शिव और आधी पार्वती, शिव-शक्ति का मिलन।
मौन से परम ज्ञान देने वाले शिव, आदिगुरु।
प्रथम योगी, योग विद्या के स्रोत।
अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट शिव।
समस्त प्राणियों के स्वामी, शिव का प्राचीन रूप।
परंपरा में शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार माने जाते हैं।
गणेश और हनुमान
सर्वाधिक प्रिय और पूजनीय देवों में, प्रत्येक शुभ कार्य से पूर्व पूजे जाने वाले विघ्नहर्ता श्री गणेश, और निर्भय भक्त श्री हनुमान, अनेक प्रिय रूपों में पूजे जाते हैं।
भगवान गणेश का प्रिय बाल रूप।
समस्त विघ्नों को हरने वाले गणेश।
महाराष्ट्र में गणेश के आठ स्वयंभू पावन धाम।
सभी दिशाओं के रक्षक, हनुमान का पंचमुख रूप।
देवी (शक्ति): रूप और अवतार
जगजननी आदिशक्ति तीन महादेवियों के रूप में तथा अनेक सौम्य और उग्र रूपों में प्रकट होती हैं, जो सम्पूर्ण भारत में पूजी जाती हैं।
त्रिदेवी
कोमल जगजननी, शिव की अर्धांगिनी और शक्ति की स्रोत।
धन, वैभव और समृद्धि की देवी।
ज्ञान, संगीत और कलाओं की देवी।
नवदुर्गा, नवरात्रि के नौ रूप
पर्वतराज की पुत्री, नवरात्रि के प्रथम दिन की देवी।
तप और भक्ति की देवी, द्वितीय दिन पूजित।
सिंह पर सवार, मस्तक पर घंटा रूपी चंद्र धारण करने वाली वीर देवी।
अपनी मुस्कान से सृष्टि की रचना करने वाली तेजस्वी देवी।
भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की ममतामयी माता।
महिषासुर का वध करने वाली योद्धा देवी।
समस्त भय का नाश करने वाली निर्भय देवी।
शांति और क्षमा की श्वेतवर्णा देवी।
समस्त सिद्धियाँ प्रदान करने वाली, अंतिम दिन की देवी।
दस महाविद्या
काल और संहार की उग्र माता, प्रथम महाविद्या।
भवसागर से पार लगाने वाली करुणामयी देवी।
त्रिलोक की परम सुंदरी देवी, ललिता।
समस्त लोकों की स्वामिनी और जगजननी।
तप और आध्यात्मिक अग्नि की उग्र देवी।
आत्म-बलिदान की देवी, जीवन-मृत्यु और नवजीवन का प्रतीक।
शून्य, वैराग्य और परे के ज्ञान की देवी।
समस्त विरोधी शक्तियों को स्तंभित करने वाली स्वर्णिम देवी।
वाणी और संगीत की देवी, तांत्रिक सरस्वती।
ऐश्वर्य और कृपा की कमल देवी, तांत्रिक लक्ष्मी।
नवदुर्गा और महाविद्या क्या हैं?
नवदुर्गा माँ दुर्गा के नौ रूप हैं जो नवरात्रि की नौ रातों में पूजे जाते हैं। दस महाविद्या शाक्त परंपरा की दस ज्ञान-देवियाँ हैं, काली से लेकर कमला तक।