
महाविद्या · दस में पंचम
भैरवीBhairavi
तप और आध्यात्मिक अग्नि की उग्र देवी।
ॐ ह्रीं भैरव्यै नमःभैरवी की कथा
भैरवी, पंचम महाविद्या, भैरव की उग्र संगिनी हैं, तप की देवी, आध्यात्मिक अनुशासन की वह भीतरी अग्नि जो अशुद्धि को भस्म करती है। तेजोमयी और विकराल, वे वह ऊष्मा हैं जो साधक को परिपक्व करती है।
वे समस्त वस्तुओं में क्रियाशील क्षय और रूपांतरण की शक्ति हैं, वह बल जो पुराने को घिसकर नए के उदय हेतु स्थान बनाता है, और वह जलती आकांक्षा जो आत्मा को दिव्य की ओर धकेलती है।
अर्थ
भैरवी रूपांतरण की पावन अग्नि हैं, वह तप जो मैल नष्ट कर स्वर्ण प्रकट करता है। वे सिखाती हैं कि आध्यात्मिक पथ ऊष्मा और तीव्रता माँगता है, और जो संहार जैसा प्रतीत होता है वह आत्मा और परमात्मा के बीच खड़ी हर वस्तु का दहन है।
भक्ति आँगन ऐप प्रतिदिन एक नया दर्शन, सरल मंत्र, जप गणक और पंचांग लेकर आता है, अब App Store पर उपलब्ध। Android पर हैं? प्रतीक्षा सूची में शामिल हों।
यह कथा आगे बढ़ाइए 🙏
कथा बाँटना भी सेवा है। जिसे आज इस आशीर्वाद की ज़रूरत है, उसे भेजिए।