सावन 2026सावन / श्रावण
भगवान शिव का सबसे पवित्र मास। 2026 में सावन कब आरंभ और समाप्त होता है, सभी चार सावन सोमवार की तिथियां, और इस मास को कैसे मनाया जाता है।
सावन सोमवार 2026 तिथियां
सावन के सोमवार, जिन्हें सावन सोमवार कहते हैं, भगवान शिव की आराधना के लिए इस मास के सबसे पवित्र दिन हैं। उत्तर भारत में 2026 में चार सावन सोमवार हैं:
सुहागिन स्त्रियां सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत भी रखती हैं और अपने परिवार के कल्याण के लिए माता पार्वती की प्रार्थना करती हैं।
सावन शिव को क्यों प्रिय है
जब देवताओं और असुरों ने क्षीर सागर का मंथन किया, तब हलाहल नामक भयंकर विष उत्पन्न हुआ जो समस्त सृष्टि के लिए संकट बन गया। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को पीकर अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। सावन वर्षा ऋतु में आता है, और भक्त उस भगवान को शीतलता देने के लिए शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाते हैं जिन्होंने कभी संसार का विष पिया था।
यह भी कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन मास में कठोर तपस्या की थी, इसीलिए यह मास उन्हें विशेष प्रिय है और विवाह तथा परिवार की प्रार्थनाओं के लिए शुभ माना जाता है।
सावन कैसे मनाया जाता है
- सावन सोमवार व्रत: मास के सोमवारों को उपवास, प्रायः एक समय भोजन, और संध्या को शिव पूजा।
- जलाभिषेक और रुद्राभिषेक: शिवलिंग पर जल, दूध, शहद और गंगाजल अर्पित करना, तथा बेल पत्र, धतूरा और श्वेत पुष्प चढ़ाना।
- ॐ नमः शिवाय: पूरे मास इस पंचाक्षरी मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप।
- कांवड़ यात्रा: कांवड़िये गंगा का पवित्र जल दूर-दूर तक ले जाकर शिव मंदिरों में अर्पित करते हैं।
सावन 2026 के भीतर आने वाले पर्व
सावन में कई प्रिय व्रत-त्योहार आते हैं: हरियाली तीज (15 अगस्त), नाग पंचमी (17 अगस्त), और यह श्रावण पूर्णिमा को रक्षा बंधन (28 अगस्त) के साथ समाप्त होता है। दक्षिण में इसी अवधि में वरलक्ष्मी व्रत आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में सावन कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में सावन गुरुवार, 30 जुलाई 2026 से आरंभ होकर शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को समाप्त होता है। दक्षिण एवं पश्चिम भारत (अमांत) में सावन 13 अगस्त से 10 सितंबर 2026 तक रहता है।
2026 में कितने सावन सोमवार हैं?
उत्तर भारत में 2026 में चार सावन सोमवार हैं: 3, 10, 17 और 24 अगस्त।
सावन सोमवार को क्या करते हैं?
भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाते हैं, बेल पत्र अर्पित करते हैं और ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं। अनेक लोग शिव मंदिर जाकर रुद्राभिषेक करते हैं।
उत्तर और दक्षिण भारत में सावन की तिथियां अलग क्यों हैं?
उत्तर भारत पूर्णिमांत पंचांग का अनुसरण करता है, जिसमें मास पूर्णिमा को समाप्त होता है, जबकि दक्षिण एवं पश्चिम भारत अमांत पंचांग का, जिसमें मास अमावस्या को समाप्त होता है। इससे श्रावण का आरंभ लगभग दो सप्ताह आगे-पीछे हो जाता है।
साथ में जाप: ॐ नमः शिवाय 108 बार
पंचाक्षरी मंत्र की पूरी माला, सच्ची इंसानी आवाज़ में, AI नहीं, साथ में जाप की गति से। प्ले दबाकर गिनती रखिए; उससे पहले कुछ लोड नहीं होता।
12:54भक्ति आँगन के साथ सावन मनाइए। भगवान शिव का दैनिक दर्शन, आपके नगर का पंचांग और शुभ मुहूर्त, ॐ नमः शिवाय के लिए जप गणक, और दैनिक श्लोक।
App Store पर निःशुल्क डाउनलोड करेंतिथियां 2026 के लिए भारतीय मानक समय (IST) में हैं और व्यापक रूप से प्रचलित पूर्णिमांत (उत्तर भारत) तथा अमांत (दक्षिण एवं पश्चिम) गणना पर आधारित हैं। चूंकि हिंदू तिथि आपके स्थानीय सूर्योदय की तिथि पर निर्भर करती है, भारत के बाहर के भक्त कुछ दिन एक तिथि आगे या पीछे मान सकते हैं। भक्ति आँगन ऐप आपके सटीक स्थान के अनुसार पंचांग की गणना करता है। क्षेत्रीय परंपराएं भिन्न होती हैं; व्रत एवं पूजा के मुहूर्त के लिए कृपया अपने पंडित जी से भी परामर्श करें।