पर्व मार्गदर्शिका

दिवाली 2026दीपावली

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। धनतेरस (6 नवंबर 2026) से भाई दूज (11 नवंबर 2026) तक पूरा कैलेंडर, लक्ष्मी पूजा, कथा और पूजन विधि।

दिवाली 2026
रविवार, 8 नवंबर 2026
अगले वर्ष: दिवाली 2027 शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 को है।
तिथि भारत के लिए सत्यापित है (दृक पंचांग, नई दिल्ली)। भारत के बाहर कुछ तिथि आधारित दिन एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं: अपने नगर का पंचांग देखें।
ॐ

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दिवाली 2026: सभी तिथियां

दिनतिथि
धनतेरसशुक्रवार, 6 नवंबर 2026
काली चौदस, छोटी दिवाली (संध्या दीपदान)शनिवार, 7 नवंबर 2026
नरक चतुर्दशी (अभ्यंग स्नान, भोर)रविवार, 8 नवंबर 2026
दिवाली, लक्ष्मी पूजारविवार, 8 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)मंगलवार, 10 नवंबर 2026
भाई दूजबुधवार, 11 नवंबर 2026
दिवाली 2027 की तिथियां
दिनतिथि
धनतेरसबुधवार, 27 अक्टूबर 2027
काली चौदस, छोटी दिवाली (संध्या दीपदान)बुधवार, 27 अक्टूबर 2027
नरक चतुर्दशी (अभ्यंग स्नान, भोर)गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027
दिवाली, लक्ष्मी पूजाशुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027
गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)शनिवार, 30 अक्टूबर 2027
भाई दूजरविवार, 31 अक्टूबर 2027

छोटी दिवाली काली चौदस की दीपदान संध्या है, जबकि नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान अगली भोर का है: एक ही चतुर्दशी तिथि के दो पर्व। तिथि देर तक चलने पर अभ्यंग स्नान स्वयं लक्ष्मी पूजा की भोर में पड़ सकता है, जैसा तालिका में है।

2026 में आपके देश में दिवाली

लक्ष्मी पूजा आपके अपने प्रदोष काल से होती है, इसलिए मुहूर्त और कभी-कभी तारीख भी नगर अनुसार बदलती है। नीचे हर पृष्ठ पर सत्यापित नगरवार समय हैं।

दिवाली की कथा

दिवाली दीपों का पर्व है, जो कार्तिक अमावस्या की सबसे अंधेरी रात को मनाया जाता है, जब हर घर दीपों की पंक्तियों से अंधकार का उत्तर देता है। इसकी सबसे प्राचीन कथा भगवान राम की है: चौदह वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद सीता और लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने हर द्वार पर दीप जलाए, ताकि उनके राजा को नगर जगमगाता मिले। दिवाली की रात का हर दीया राम का स्वागत करती एक छोटी अयोध्या है।

इसी रात्रि क्षीरसागर मंथन से प्रकट माता लक्ष्मी का स्वागत स्वच्छ, दीपों से सजे घरों में गणेश सहित संध्या लक्ष्मी पूजा से होता है। अमावस्या से पूर्व की चतुर्दशी नरकासुर पर कृष्ण और सत्यभामा की विजय तथा सोलह हज़ार बंदियों की मुक्ति की है, जो रात्रि में काली चौदस के दीपदान और अगली भोर के अभ्यंग स्नान से स्मरण होती है। और अगले दिन श्रीकृष्ण ने व्रज की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था, जो अन्नकूट के भोग से पूजित होता है। पूरी कथाएं हिंदू कथा संग्रह में पढ़ें।

पांच दिनों का समापन भाई दूज से होता है, जब बहनें भाइयों की मंगलकामना करती हैं, जैसे यमुना ने यम के लिए की थी। अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, और हर बाहरी तम पर भीतर का दीपक: यही संपूर्ण दिवाली है।

दिवाली कैसे मनाई जाती है

धनतेरसद्वार स्वच्छ कर दीप जलाए जाते हैं, और लक्ष्मी एवं धन्वंतरि के लिए सोना, चांदी या नए बर्तन घर लाए जाते हैं।
लक्ष्मी पूजाअमावस्या की संध्या को दीप, रंगोली, खील-बताशे और बहीखातों सहित लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है।
दीप और रंगोलीहर मुंडेर पर तेल के दीयों की पंक्तियां और द्वार पर रंगोली, जो रात भर जलती रहती हैं।
परिवार और प्रसादनए वस्त्र, पड़ोसियों में मिठाई, और सबसे पहले बड़ों का आशीर्वाद।

उत्तर भारत में राम की कथा पर्व का केंद्र है; पश्चिम में व्यापारी लक्ष्मी के समक्ष नए बहीखाते खोलते हैं; बंगाल में यही रात्रि काली पूजा की है; और दक्षिण भारत में सूर्योदय से पूर्व तेल स्नान सहित नरक चतुर्दशी प्रमुख है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में दिवाली कब है?

दिवाली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। पर्व के दिन 6 नवंबर 2026 के धनतेरस से 11 नवंबर 2026 के भाई दूज तक चलते हैं।

2026 में भारत के बाहर दिवाली की तारीख क्या है?

लक्ष्मी पूजा अमावस्या के स्थानीय प्रदोष काल से होती है, इसलिए संध्या और कभी-कभी तारीख भी नगर अनुसार बदलती है। 2026 के लिए सत्यापित: न्यूयॉर्क 8 नवंबर 2026 (05:04 PM to 06:52 PM); शिकागो 8 नवंबर 2026 (04:55 PM to 06:43 PM); लॉस एंजिल्स 8 नवंबर 2026 (05:16 PM to 07:08 PM); लंदन 8 नवंबर 2026 (04:35 PM to 06:12 PM); टोरंटो 8 नवंबर 2026 (05:17 PM to 07:03 PM); सिडनी 8 नवंबर 2026 (08:04 PM to 09:33 PM)।

2026 में छोटी दिवाली कब है?

छोटी दिवाली (काली चौदस दीपदान) शनिवार, 7 नवंबर 2026 की संध्या को है; नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान अगली भोर, 8 नवंबर 2026 को है।

लक्ष्मी पूजा रात में क्यों होती है?

लक्ष्मी पूजा अमावस्या के प्रदोष और निशिथ काल की है, जब दीप जलते हैं और मान्यता है कि देवी प्रकाशित, स्वागतमय घरों की ओर आती हैं। सटीक मुहूर्त आपके नगर पर निर्भर है: अपने स्थानीय समय के लिए दैनिक पंचांग देखें।

दिवाली हर वर्ष अलग तिथि पर क्यों पड़ती है?

दिवाली चंद्र पंचांग की कार्तिक अमावस्या से तय होती है, किसी स्थिर सौर तारीख से नहीं, इसलिए यह हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर के बीच बदलती रहती है।

दिवाली की कथा क्या है?

रावण पर विजय के बाद भगवान राम का अयोध्या आगमन और दीपों से सजा नगर; क्षीरसागर से माता लक्ष्मी का प्राकट्य; और कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध। तीनों कथाएं अंधकार पर प्रकाश की विजय हैं।

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