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महाशिवरात्रि 2026: तिथि, चार प्रहर पूजा और कथा

पर्व मार्गदर्शिका

महाशिवरात्रि 2026महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि 2026 रविवार, 15 फ़रवरी 2026 को है। शिव-पार्वती विवाह, ज्योतिर्लिंग और नीलकंठ की कथाएं, व्रत विधि और चार प्रहर की पूजा।

महाशिवरात्रि 2026
रविवार, 15 फ़रवरी 2026
तिथि भारत के लिए सत्यापित है (दृक पंचांग, नई दिल्ली)। भारत के बाहर कुछ तिथि आधारित दिन एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं: अपने नगर का पंचांग देखें।

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साथ में जाप: ॐ नमः शिवाय 108 बार

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Om Namah Shivaya 108 Times ॐ | Peaceful Shiva Mantra Jaap (Real Human Voice) 12:54

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महाशिवरात्रि की कथा

महाशिवरात्रि शिव की महान रात्रि है, जो फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को आती है। इसमें तीन कथाएं मिलती हैं। इसी रात्रि शिव-पार्वती का विवाह हुआ, जब वैरागी ने पर्वतपुत्री की दीर्घ तपस्या स्वीकार की। इसी रात्रि शिव अनादि-अनंत ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए, जिसका आदि-अंत ब्रह्मा और विष्णु भी न पा सके। और समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने पीकर कंठ में धारण किया और नीलकंठ कहलाए। कथाएं कथा संग्रह में पढ़ें।

अधिकांश पर्वों के विपरीत शिवरात्रि दिन नहीं, रात्रि है: चार प्रहरों का जागरण, प्रत्येक प्रहर में जल, दूध, मधु और बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक, और ॐ नमः शिवाय का जप भक्त को भोर तक ले जाता है। मान्यता है कि इस रात्रि वैरागी और गृहस्थ, व्रती और सांसारिक, सब महादेव के समान निकट होते हैं।

महाशिवरात्रि कैसे मनाई जाती है

व्रतदिन का उपवास, सामर्थ्य अनुसार फलाहार या निर्जला, प्रातः संकल्प के साथ।
चार प्रहर पूजारात्रि के प्रत्येक प्रहर में अभिषेक: जल, फिर दूध-दही, फिर मधु-घृत, फिर बेलपत्र और भस्म।
बेलपत्र और जपत्रिदल बेलपत्र के साथ ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय जप।
जागरणकीर्तन और कथा के साथ रात्रि जागरण; पारण सूर्योदय के बाद।

सोमनाथ से काशी विश्वनाथ तक बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे बड़ी रात्रि शोभायात्राएं होती हैं, उज्जैन में महाकाल की परंपरा प्रमुख है, और दक्षिण में लिंगाष्टकम और रुद्राभिषेक के साथ रात्रि जागरण चलता है। मासिक शिवरात्रि और श्रावण मास की सावन शिवरात्रि इसी महान रात्रि की छोटी प्रतिध्वनियां हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में महाशिवरात्रि कब है?

महाशिवरात्रि रविवार, 15 फ़रवरी 2026 को है। मुख्य पूजा रात्रि की है, चारों प्रहरों में।

शिवरात्रि रात में क्यों मनाई जाती है?

नाम का अर्थ ही शिव की रात्रि है: विवाह, ज्योतिर्लिंग प्राकट्य और विषपान, तीनों रात्रि कथाएं हैं, और चतुर्दशी तिथि रात्रि के चार प्रहरों के जागरण से पूजित होती है।

महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि में क्या अंतर है?

हर चंद्र मास में एक शिवरात्रि आती है; श्रावण की शिवरात्रि कांवड़ियों को प्रिय है, परंतु फाल्गुन की महाशिवरात्रि वर्ष की प्रधान रात्रि है।

शिवलिंग पर क्या अर्पित होता है?

सर्वप्रथम जल और दूध, साथ में बेलपत्र, धतूरा, भस्म और श्वेत पुष्प; शिव को तुलसी और हल्दी परंपरागत रूप से अर्पित नहीं होतीं।

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