
महाविद्या · दस में षष्ठ
छिन्नमस्ताChhinnamasta
आत्म-बलिदान की देवी, जीवन, मृत्यु और नवजीवन की शक्ति।
ॐ छिन्नमस्तायै नमःछिन्नमस्ता की कथा
छिन्नमस्ता, षष्ठ महाविद्या, ज्ञान-देवियों में सबसे चौंकाने वाली हैं, परम आत्म-बलिदान की मुद्रा में चित्रित, अपने ही जीवन-रस से अपने भक्तों का पोषण करती हुई।
उनका विस्मयकारी रूप एक गूढ़ शिक्षा है, हिंसा की नहीं अपितु त्याग की: लघु स्व का स्वेच्छा से समर्पण, और यह सत्य कि जीवन, मृत्यु और नवजीवन एक ही सतत प्रवाह हैं।
अर्थ
छिन्नमस्ता पूर्ण आत्म-दान के साहस और अहं के अतिक्रमण का प्रतीक हैं। वे सिखाती हैं कि स्वेच्छा से अर्पित जीवन-रस सबके पोषण हेतु लौट आता है, और सीमित स्व को खोना ही असीम में जागना है। यह त्याग और निर्भय समर्पण का ज्ञान है।
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