भगवान गणेश · उत्पत्ति
गणेश जन्मThe Birth of Ganesha
कैसे पार्वती के पुत्र ने गजमुख धारण किया और देवों में अग्रणी बने।
देवी पार्वती ने अपना एक रक्षक चाहते हुए अपने ही शरीर के उबटन से एक बालक बनाया और उसमें प्राण फूँके। उन्होंने उसे अपने द्वार पर बिठाकर आदेश दिया कि जब वे स्नान कर रही हों तब किसी को भीतर न आने दे।
जब भगवान शिव लौटे और उस बालक ने, उन्हें न पहचानते हुए, उनका मार्ग रोका, तब एक भीषण विवाद हुआ, और क्रोध में शिव ने उस बालक का सिर काट दिया। पार्वती ने बाहर आकर अपने पुत्र को मृत पाया और शोक तथा क्रोध से भर उठीं, और उनके दुःख से लोक काँप उठे।
उन्हें सांत्वना देने हेतु शिव ने अपने गणों को भेजा कि जो पहला प्राणी मिले उसका सिर ले आएँ, जो एक हाथी था। उन्होंने वह सिर बालक पर स्थापित कर उसे पुनर्जीवित किया, उसका नाम गणेश रखा और उसे समस्त देवों में सबसे पहले, प्रत्येक कार्य से पूर्व, पूजे जाने का वरदान दिया।
कथा का सार
गणेश जन्म श्रद्धा, टूटे हुए की पुनर्स्थापना और नए आरंभ के विवेक की शिक्षा देता है। गजमुख महान बुद्धि और विवेक का प्रतीक है, और सबसे पहले पूजे जाने का उनका स्थान हमें स्मरण कराता है कि प्रत्येक कार्य विनम्रता, स्पष्टता और विघ्नों के निवारण के साथ आरंभ करें।
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