
विष्णु का षष्ठ अवतार · दशावतार
परशुरामParashurama
शक्ति के निरंकुश होने पर संतुलन बहाल करने हेतु परशु उठाने वाले योद्धा-ऋषि।
ॐ परशुरामाय नमःपरशुराम की कथा
परशुराम का जन्म ऋषि जमदग्नि और उनकी भक्त पत्नी रेणुका के यहाँ हुआ, और भगवान शिव ने उन्हें दिव्य परशु तथा समस्त शस्त्र और शास्त्रों का ज्ञान प्रदान किया।
उनके युग में क्षत्रिय राजा क्रूर और अधर्मी हो गए थे, ऋषियों और प्रजा पर अत्याचार करते और जो उनका नहीं था उसे हरते थे। जब घमंडी राजा कार्तवीर्य अर्जुन ने उनके पिता की पवित्र गाय चुराई और बाद में जमदग्नि का वध करवा दिया, तब परशुराम संसार को ठीक करने उठे।
बार-बार उन्होंने उन अहंकारी शासकों को विनम्र किया जिन्होंने धर्म त्याग दिया था, जब तक संतुलन बहाल न हुआ। अपने उत्तर जीवन में वह योद्धा-ऋषि तपस्या में लीन हो गए, और परंपरा मानती है कि वे आज भी जीवित हैं, युगों-युगों में योग्य जनों को शस्त्रविद्या के गुरु।
अर्थ
षष्ठ अवतार परशुराम वह सुधारक शक्ति हैं जो तब प्रकट होती है जब शक्ति अपना कर्तव्य भूल जाती है। यह कथा गंभीर स्मरण कराती है कि बल शोषण के लिए नहीं, रक्षा के लिए है, और धर्मयुक्त क्रोध को भी अंततः तप और शांति में विलीन होना है। वे युगों के बीच खड़े हैं, वह ब्राह्मण जो केवल धर्म हेतु योद्धा का परशु उठाते हैं।
भक्ति आँगन ऐप प्रतिदिन एक नया दर्शन, सरल मंत्र, जप गणक और पंचांग लेकर आता है, अब App Store पर उपलब्ध। Android पर हैं? प्रतीक्षा सूची में शामिल हों।
यह कथा आगे बढ़ाइए 🙏
कथा बाँटना भी सेवा है। जिसे आज इस आशीर्वाद की ज़रूरत है, उसे भेजिए।