
शिव का रूप · प्रथम योगी
आदियोगीAdiyogi
प्रथम योगी, योग और अंतर्विज्ञान के स्रोत।
ॐ नमः शिवायआदियोगी की कथा
कहा जाता है कि बहुत पहले भगवान शिव कैलाश पर्वत की ऊँचाइयों पर गहन ध्यान में बैठे थे, संसार से परे एक समाधि में लीन। वे आदियोगी थे, सर्वप्रथम योगी, जिनमें योग का विज्ञान पहली बार जागृत हुआ।
सात साधक वर्षों तक उनका ज्ञान पाने हेतु दृढ़ रहे। अंततः, जिस दिन को प्रथम गुरु पूर्णिमा के रूप में स्मरण किया जाता है, वे आदि गुरु के रूप में उनकी ओर मुड़े और योग-विज्ञान का संचार आरंभ किया, जिसे सप्तर्षियों ने संसार भर में पहुँचाया।
उसी स्रोत से योग के समस्त मार्ग प्रवाहित होते हैं, वे विधियाँ जिनसे एक मनुष्य रूपांतरित होकर दिव्य तक पहुँच सकता है।
अर्थ
आदियोगी के रूप में शिव स्वयं योग के उद्गम हैं, वह जिन्होंने पहली बार दर्शाया कि एक मनुष्य अपनी सीमाओं से परे विकसित होकर अनंत से मिलन कर सकता है। कैलाश पर उनका ध्यान पूर्ण स्थिरता और अंतर-प्रभुत्व का चित्र है। वे भीतर के मार्ग के शाश्वत गुरु हैं।
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