
महाविद्या · दस में तृतीय
त्रिपुर सुंदरीTripura Sundari
त्रिलोक की परम सुंदरी देवी, ललिता और षोडशी नाम से भी पूजित।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमःत्रिपुर सुंदरी की कथा
त्रिपुर सुंदरी, अर्थात त्रिलोक की सुंदरी, तृतीय महाविद्या और श्रीविद्या परंपरा की परम देवी हैं, ललिता और षोडशी के नाम से भी पूजित। तेजोमयी और कृपामयी, वे श्रीयंत्र के हृदय में विराजती हैं, ब्रह्मांड ही उनका आसन।
वे केवल रूप की नहीं, अपितु चेतना की सुंदरता हैं, वह आनंद जो समस्त वस्तुओं के मूल में है, वह रानी जिनका आधिपत्य प्रत्येक प्राणी की जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति अवस्थाओं पर है।
अर्थ
त्रिपुर सुंदरी प्रकट करती हैं कि परम सत्य केवल सत्य और शक्ति ही नहीं, अपितु परम सौंदर्य और आनंद भी है। वे श्रीयंत्र द्वारा शिव-शक्ति के मिलन के रूप में पूजित हैं, और उनकी कृपा साधक को बाहरी सौंदर्य से आत्मा के भीतरी वैभव की ओर ले जाती है।
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